जानिए क्या है बीटिंग रीट्रिट सेरेमनी

राजपथ पर 26 जनवरी को 71 वें गणतंत्र दिवस मनाए जाने के बाद अब लोगों को बीटिंग रीट्रिट सेरेमनी का इंतजार रहता है। अधिकतर लोग इस सेरेमनी के बारे नहीं जानते हैं। इस खबर के माध्यम से हम आपको ये बता रहे हैं कि क्या होती है बीटिंग द रिट्रीट सेरेमनी और क्या-क्या होता है इसमें खास। 


26 जनवरी की परेड से दुनिया को अपनी ताकत दिखाने के बाद अब इंतजार 29 जनवरी को होने वाले 'बीटिंग रीट्रिट सेरेमनी' का रहता है। रायसीना रोड पर राष्ट्रपति भवन के सामने इसका प्रदर्शन किया जाता है। 26 जनवरी की सुबह 10 बजे नैशनल सल्‍यूट के साथ शुरू हुई यह परेड, लगभग 90 मिनट तक चली। इसमें एमआई -17 और रुद्र आर्मड हेलिकॉप्‍टरों ने फ्लाइपास्‍ट दिया। इसमें विभिन्‍न राज्‍यों, केंद्र शासित प्रदेशों और सरकारी विभागों की 22 झांकियां इंडिया गेट के सामने से गुजरीं, इनके पीछे-पीछे सांस्‍कृतिक कार्यक्रम करते स्‍कूली बच्‍चे और सीआरपीएफ की ऑल विमिन टीमें भी चलीं। इस परेड को देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग राजपथ के दोनों ओर बैठते हैं।


बीटिंग द रिट्रीट सेरेमनी को मुख्य रूप से गणतंत्र दिवस का समापन समारोह कहा जाता है। यह सेना का अपने बैरक में लौटने का प्रतीक भी माना जाता है। बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी गणतंत्र दिवस की नई परंपरा नहीं है यह अंग्रेजों के समय से आयोजित होती आ रही है। बीटिंग द रिट्रीट दिल्ली के विजय चौक पर आयोजित की जाती है। इस मौके पर राष्ट्रपति भवन को रंग बिरंगी लाइटों से सजाया जाता है। ये देखने लायक होता है।